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तु सामने था पर न कहीं तु मिला मुझे (ग़ज़ल)

                
                                                         
                            तु सामने था पर न कहीं तु मिला मुझे
                                                                 
                            
खोजी तुझे नज़र न कहीं तु मिला मुझे

ता उम्र जैसे मुझको भी तेरी तलाश थी
फिर शाम और सहर न कहीं तु मिला मुझे

सोचा कि देख लूं तुझे मैं तेरे घर ही में
देखा जो तेरे घर न कहीं तु मिला मुझे

कुछ ऐसे तु यहां जुदा मुझसे हुआ कि फिर
आई तेरी ख़बर न कहीं तु मिला मुझे

चलते हुए मैं संग जो तेरे रुका यहां
फिर मेरे हमसफ़र न कहीं तु मिला मुझे।
-अनमोल
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2 महीने पहले

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