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चाहत (नज़्म)

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई चाहत तो होती अपने दिल में
        
                                                    
                            
कि ये चाहत भी अब दिल में नहीं है
कोई हसरत तो होती दिल में अपने
कि ये हसरत भी अब दिल में नहीं है

बस एक वीरानी सी वीरानी है अब
कोई अब रात न सुहानी है अब
न सुबह की कोई चाहत है दिल में
न अब कोई भी हसरत है दिल में

न चाहत है तुझे अब देखने की
और न मिलना तुझसे चाहता हूं
बस एक सवाल ख़ुद से कर रहा हूं
कि क्या मैं अब भी तुझको चाहता हूं

न जाने दिल में क्या-क्या चल रहा है
बेवजह दिल भी क्यों मचल रहा है।

- अनमोल
2 महीने पहले
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