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अब के दरिया को तू पलकों से उतर जाने दे

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब के दरिया को तू पलकों से उतर जाने दे
        
                                                    
                            
कोई जो ख़्वाब बिखरता है बिखर जाने दे

बांधकर रख न सकेगा तू किसी लम्हे को
वक्त जो भी ये गुज़रता है गुज़र जाने दे

अब क्यों उम्मीद लगाना है किसी से हमदम
वादे से जो भी मुकरता है मुकर जाने दे

दिल को तू रोक न पायेगा किसी बंधन में
अब ये जाता है जिधर भी तू उधर जाने दे

हाथ तेरा भी मैं थामूंगा थोड़ा ठहरो
दोस्त हालत को मेरी थोड़ा सुधर जाने दे।
-अनमोल
2 घंटे पहले
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