अब के दरिया को तू पलकों से उतर जाने दे
कोई जो ख़्वाब बिखरता है बिखर जाने दे
बांधकर रख न सकेगा तू किसी लम्हे को
वक्त जो भी ये गुज़रता है गुज़र जाने दे
अब क्यों उम्मीद लगाना है किसी से हमदम
वादे से जो भी मुकरता है मुकर जाने दे
दिल को तू रोक न पायेगा किसी बंधन में
अब ये जाता है जिधर भी तू उधर जाने दे
हाथ तेरा भी मैं थामूंगा थोड़ा ठहरो
दोस्त हालत को मेरी थोड़ा सुधर जाने दे।
-अनमोल
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