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अब भला दिल को क्यों लगाऊं मैं

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब भला दिल को क्यों लगाऊं मैं
        
                                                    
                            
मुश्किलें अपनी क्यों बढ़ाऊं मैं

क्या मिलेगा मुझे यूं रोने से
बेवजह अश्क क्यों बहाऊं मैं

लोग चेहरे को पढ़ ही लेते हैं
अपने आँसू कहां छुपाऊं मैं

जबकि अरमान मर चुके हैं सब
उनको अब कैसे फिर जगाऊं मैं

जो भरम रख न पाए रिश्ते का
उनसे फिर किस तरह निभाऊं मैं

सोचता हूं कि अपने हाथों को
अब कहां जाके फिर दिखाऊँ मैं

जानता हूं कि टूट जाएंगे
अब नए ख़्वाब क्यों सजाऊं मैं

दिल में कोई नहीं सिवा तेरे
बात कैसे तुझे बताऊं मैं।
-अनमोल
एक महीने पहले
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