विज्ञापन

मुस्कुरा कर जियो

Ankur Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कांटो से भी रिश्ता निभा कर जियो ,
        
                                                    
                            
जितना भी तुम जियो मुस्कुरा कर जियो,...

यूँ तो अपने दुखों को मिटाते हैं सब,
दुसरों के दुख तुम मिटा कर जियो...

जो यादें अभी तक ना ओझल हुईं,
वो यादें पुरानी भुला कर जियो..

यूँ अकेले ही खुशियां बिताते नहीं ,
दुसरो संग भी खुशियां बिता कर जियो...

गैरों संग तो बिताते हो हर रोज तुम ,
अपनो संग एक शाम बिता कर जियो ...

दोस्तों को गले तो लगाते हैं सब ,
दुश्मनो को गले भी लगा कर जियो....

.
By Ankur yadav


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें। 
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all