प्यारे स्वदेश तेरे लिए मैं क्या करूं?
खाली कैसे आऊं,क्यों न हाथों में तलवार धरूं?
हृदय में मां! मैं तेरी तस्वीर धरूं
खुद को वीर करूं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'