मेरे स्वदेश से बढ़ कर कुछ भी नहीं है
मेरे स्वदेश से सुंदर कुछ भी नहीं है
गंगा,यमुना,सरस्वती,कृष्णा,कावेरी यहीं है
हमारा हिमालय,हमारा शिवालय यहीं है
हमारा बिहार,उत्तरप्रदेश,राजस्थान यहीं है
हमारा बागी बलिया, बागी बैरिया यहीं है
हमारा भृगु स्थान,हमारा हृदय स्थान यहीं है
हमारे वेद गीता रामायण पुराण कुरान यहीं है
हमारे राणा प्रताप,शिवा,पृथ्वी राज चौहान यहीं है
हमारे स्वदेश से बढ़ कर कुछ भी तो नहीं है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'