सुलग रही है आग
मेरे हृदय में हिंदुस्तान के लिए
सुलग रही है आग
मेरे हृदय में सर्वस्व दान के लिए
करुं तप त्याग
मैं प्यारे हिंदुस्तान के लिए
लगा दूं मैं आग
सारे जहान के लिए
बना दूं सबका भाग
विश्व महान के लिए
सुलग रही है आग
मेरे हृदय में हिंदुस्तान के लिए।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'