विज्ञापन

सांझ की तन्हाई

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदगी के पत्ते झड़ने लगे हैं,
        
                                                    
                            
अपने हमसे बिछड़ने लगे हैं।
बातें खामोशी में बदलने लगी हैं,
वक्त जैसे ढलने लगा है।
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all