बड़े सपनों को दो पर
मदद कर, निरंतर
तब तो छूएंगे सपने अंबर
भर कर उत्साह अपने अंदर
करो कर्म कि उछल जाए समंदर
हिल जाए अंबर।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'