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रंग बदलते लोग

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज अपराधी खुद को पुलिस बताते हैं
        
                                                    
                            
ऐसे छल कपट कर ठग कर ये जाते हैं
गिरगिट भी नहीं उतना रंग बदल पाते हैं
जितना लोग रंग बदल बदल कर आते हैं
पहले नेता होते थे त्यागी अब ठग कहलाते हैं
हर चुनाव में ये नए मुखौटे पहन कर आते हैं
किस पर करे कोई विश्वास आज के जमाने में?
एक पल भी नहीं लगता खुद को लुटवाने में
सदाचारी बच्चियों संग दुर्व्यवहार कर जाते हैं
सतर्क रहने के बाद भी बच कहां हम पाते हैं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
6 दिन पहले
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Sanjai kumar

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