घर मेरा बलिया जिला
जहां पुष्प आजादी का खिला
घर मेरा तहसील बैरिया
जो दिया अंग्रेजों को हिला
जहां से आजादी का कांरवा निकला
गंगा के मैदान वाला मैं
घाघरा के मैदान वाला मैं
मेरे नस नस में विद्रोह की आग है
मेरे नस नस में विरोध की आग है
मैं झुकता नहीं
मैं रुकता नहीं
अंबर पर जीत का बिगुल बजा दूंगा
शत्रुओं को फाड़ कर चखा मजा दूंगा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'