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स्वदेश पर मन मेरा जुटने को तैयार है।

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            भारत से मुझे प्यार है
        
                                                    
                            
मुझे नदियों से प्यार है
मुझे पर्वतों से प्यार है
मुझे मैदानों से प्यार है
मुझे भगतसिंह ,सुखदेव से प्यार है
मुझे आजाद,कलाम,अटल से प्यार है
मुझे मेरे माटी से प्यार है
मुझे मेरे गांव से प्यार है
मुझे मेरे पेड़ों से प्यार है
मुझे मेरे आसमान से प्यार है
मुझे मेरे हिंदुस्तान से प्यार है
मुझे मेरे खेत खलिहान से प्यार है
मुझे मेरे बागी बलिया से प्यार है
मुझे मेरे बागी बैरिया से प्यार है
मुझे मेरे बाग बगीचे से प्यार है
मन मेरा
तन मेरा
स्वदेश पर मर मिटने को तैयार है
स्वदेश पर मन मेरा जुटने को तैयार है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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