तेरे जैसा कोई मिला ही नहीं
प्यार पुष्प कभी खिला ही नहीं
मुंह फेर कर चल दिए
मेरे प्यार को कुचल दिए
किए कुछ गिला ही नहीं।
- सहज कुमार