छोड़ के गऊंवा
छोड़ के सुंदर ठउंवा
छोड़ के पीपल के छऊंवा
छोड़ के बैरिया बलिया
छोड़ के नदी नहर कुंआ
मत जा परदेश
सुंदर बा अपन देश
स्वर्ग बा अपन देश
कहां खईब धक्का हो?
ईहां के घरवा बा भले कच्चा हो
बनी ई एक दिन पक्का हो
रह एही ठउंवा
छोड़ के गऊंवा
मत जा विदेश
सुंदर बा अपन देश
सुंदर बा अपन भेष।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'