पेड़ों को हमनें काटा
इंसान को हमनें बांटा
मारा हमनें दोनों को चांटा
अब हम सह रहे हैं घाटा
हुआ कागज महंगा
हुआ कपड़ा महंगा
सभी चीजों पर छाई
महंगाई, हमनें लाई
महंगाई,अब आई रुलाई
सहो अब जुदाई।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'