भोजन भर पेट मिले
वसन तन भर मिले
मान मिले,सम्मान मिले
रहने को मकान मिले
तो गांव से क्यों कोई हिले?
क्यों कोई जाए परदेश?
क्यों छोड़ कर जाए देश?
अपना प्यारा देश
पेट नहीं होता
तो भेंट नहीं होता
क्यों कोई रोता?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'