क्रांति के स्वर कब तक सोयेंगे?
क्रांति के बीज हम बोयेंगे
बागी बलिया से स्वर उठेगा
फिर जमाना जल उठेगा
आज नहीं तो कल उठेगा
बदल दो सरकार को
दिखा दो स्वदेश प्यार को।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'