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क्रांति के स्वर

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            क्रांति के स्वर कब तक सोयेंगे?
        
                                                    
                            
क्रांति के बीज हम बोयेंगे
बागी बलिया से स्वर उठेगा
फिर जमाना जल उठेगा
आज नहीं तो कल उठेगा
बदल दो सरकार को
दिखा दो स्वदेश प्यार को।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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