देख अन्याय अब कलम मेरी चूप नहीं रहेगी
सच सच सदा कहेगी सच सच सदा लिखेगी
कलम मेरी सच कह कर ही रहेगी
कलम मेरी नहीं कभी दुःख सहेगी
अन्याय अब तो एक दम नहीं सहेगी
कलम मेरी तलवार से तेज रहेगी
और अंत तक लगातार लड़ेगी
और जंग जीत कर ही रहेगी।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'