आईए पहले फल्गु नदी में कीजिए स्नान
फिर कीजिए अंत: सलिला के किनारे पिंडदान
सात पुरखे तर जाएंगे, है विष्णु भगवान
का दिया हुआ गयासुर को वरदान
गयासुर ने किया तप ऐसा भारी
कि हिल गई देवों की सभा सारी
तब लिए अवतार,विष्णु भगवान धरा पर
रखे पैर गयासुर के वक्षस्थल पर
तब बोला गयासुर," दीजिए भगवान
मुझे एक ऐसा आज बड़ा वरदान
कि जो करे दर्शन मेरा मिले उसको स्वर्ग में स्थान"
तब एवमस्तु बोले विष्णु भगवान
वहीं बना विष्णु पद मंदिर महान
सिद्धार्थ गौतम गया में आए
पीपल के नीचे ध्यान लगाए
किए सुजाता के खीर को स्वीकार
बना बोधगया,जानता सारा संसार
गया की पावन धरती का कितना करूं मैं बखान?
बस एक पंक्ति में समझिए "गया से है हिंदुस्तान"
गया की धरती इतनी महान
जहां अवतार लिए विष्णु भगवान
आज गया जी को जानता जहान
है पिंडदान में गया का जग में प्रथम स्थान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'