गंगा नदी अईली मेरे द्वारे
होत सबेरे गंगा मईया अईली मेरे द्वारे
चारों ओर बहार बा
देख दहार बा
लईकन के बहार बा
जवनकन के बहार बा
बुढ़वन के बहार बा
डूबल खेत खलिहान बा
देख इहे गंगा के मैदान बा।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'