विज्ञापन

डरना मना है

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मानता हूं कोहरा घना है
        
                                                    
                            
पर डरना मना है
मरना मना है
मानता हूं आलोचना है
पर नहीं रुकना है
कहीं नहीं झुकना है
सारी समृद्धि होगी कदम तले
यदि हम संभल कर तन कर चलें।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile