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जहां बिकते साहित्यकार हैं

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धूर्त चालाक चाटुकार
        
                                                    
                            
लुट लेते हैं पुरस्कार
इनको धिक्कार है
जो करते कदाचार हैं
जिनके पास अहंकार है
जहां बिकते साहित्यकार हैं
ये ही तो बेकार हैं ।
- सहज कुमार
2 महीने पहले
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