धूर्त चालाक चाटुकार
लुट लेते हैं पुरस्कार
इनको धिक्कार है
जो करते कदाचार हैं
जिनके पास अहंकार है
जहां बिकते साहित्यकार हैं
ये ही तो बेकार हैं ।
- सहज कुमार
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