भीगा बदन
भीगा तन
पर है ताजा मन
झम झमा झम
छम छमा छम
बरसा सावन
मन भावन
भर गया ताल तलैया
भीग गई गैया
भीगे उपवन सारे
भीगे जन जन सारे।
- सहज कुमार