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भगतसिंह राजगुरु सुखदेव

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            याद करो वह दिन
        
                                                    
                            
जिस दिन
किसी घर में चूल्हा नहीं जल पाया
कोई बच्चा विद्यालय नहीं जा पाया
आंसू आंखों में थे
राज गुरु, सुखदेव सपने गढ़ रहे थे
और भगतसिंह पढ़ रहे थे
क्रांति कारी की जीवनी
याद करो उन वीरों की जीवनी
जो हंसते हंसते चूमे फांसी के फंदे को
याद करो उस बंदे को
क्या इसी आजादी के लिए
क्रांतिकारी मौत को चुन लिए
बोलो हम बने क्यों बेइमान?
कहां जा रहा है हमारा हिंदुस्तान?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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