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भगतसिंह राजगुरु सुखदेव

                
                                                         
                            याद करो वह दिन
                                                                 
                            
जिस दिन
किसी घर में चूल्हा नहीं जल पाया
कोई बच्चा विद्यालय नहीं जा पाया
आंसू आंखों में थे
राज गुरु, सुखदेव सपने गढ़ रहे थे
और भगतसिंह पढ़ रहे थे
क्रांति कारी की जीवनी
याद करो उन वीरों की जीवनी
जो हंसते हंसते चूमे फांसी के फंदे को
याद करो उस बंदे को
क्या इसी आजादी के लिए
क्रांतिकारी मौत को चुन लिए
बोलो हम बने क्यों बेइमान?
कहां जा रहा है हमारा हिंदुस्तान?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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एक घंटा पहले

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