सुन कर बड़ों के डांट फटकार
खा कर गुरू जनों के डांट मार
हम बड़े हुए हैं
हम खड़े हुए हैं
माता पिता गुरु के डांट मार
में छुपा हुआ है पावन प्यार
है बड़ों के डांट मार
में आशीर्वाद
हुए हम आबाद
खा कर बड़ों के डांट फटकार।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'