विज्ञापन

तब तक हाथ से संबंध छूट जाता है।

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब ईर्ष्या द्वेष से मन भरा हो
        
                                                    
                            
जब लोभ मोह से मन भरा हो
तब गुण में दस दोष दिखता है
तब इंसान कुछ नहीं सीखता है
बस घमंड से फूल जाता है
औकात अपना भूल जाता है
और अंततः वह पछताता है
तब तक हाथ से संबंध छूट जाता है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10619 कविताएं

View Profile

Mamta Tiwari

655 कविताएं

View Profile