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अपने देश में

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपने देश में तो
        
                                                    
                            
नाक नक्श भी देख कर अपनापन जगता है
अपनों के प्रति प्यार जगता है
जाओ परदेश में तो
दूर से अलग दिखोगे,वहां कौन किसको पूछता है?
तो भी हम विदेश भाग रहे हैं,आस एक लगाए
रात रात भर जाग रहे हैं, जाने क्या मिल जाए?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक घंटा पहले
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