अपने देश में तो
नाक नक्श भी देख कर अपनापन जगता है
अपनों के प्रति प्यार जगता है
जाओ परदेश में तो
दूर से अलग दिखोगे,वहां कौन किसको पूछता है?
तो भी हम विदेश भाग रहे हैं,आस एक लगाए
रात रात भर जाग रहे हैं, जाने क्या मिल जाए?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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