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आंखों में अंगार है

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे आंखों में अंगार है
        
                                                    
                            
और स्वदेश से प्यार है
मेरे वाणी में ललकार है
मेरे शब्दों में हुंकार है
हां स्वदेश से प्यार है
क्रांति करके
क्रांति भर के
करती कविता मेरी स्वदेश प्यार का इजहार है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
एक महीने पहले
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