मेरे आंखों में अंगार है
और स्वदेश से प्यार है
मेरे वाणी में ललकार है
मेरे शब्दों में हुंकार है
हां स्वदेश से प्यार है
क्रांति करके
क्रांति भर के
करती कविता मेरी स्वदेश प्यार का इजहार है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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