विज्ञापन

आगे बढ़ो

Ankit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जहां फंसो
        
                                                    
                            
रुको, सोचो
आगे बढ़ो
नित नूतन सपने गढ़ो
सपने सारे अपने गढ़ो
सपने सुंदर सुंदर गढ़ो
और पढ़ो
और बढ़ो।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
7 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile