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ताज महल

Anjum Aligarhi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अहसास के पत्थर पे लिखी शोख़ ग़ज़ल है।
        
                                                    
                            
ये ताज महल ताज महल ताज महल है।

मेहराबों पे लिक्खी हुई आयाते कुरआनी।
कहती हुई इक दौरे गुज़िश्ता की कहानी।
बुनियाद में बहते हुए दरिया की रवानी।
क़दमों से लिपटता हुआ शफ्फ़ाफ़ सा पानी।
जमना की तरंगों में मचलता सा कंवल है।
ये ताज महल ........................ 

औरों से जुदा इश्क़ का अंदाज़ दफ़न है।
यानी कि शहनशाह की हमराज़ दफ़न है
दुनिया जिसे कहती है मुहब्बत की निशानी।
इस क़ब्र के अंदर कोई मुमताज़ दफ़न है।
शाहों की मोहब्ब्त का यही तर्ज़े अमल है। ये ताज महल ............................

बरसात के मौसम में छलकता भी बहुत है।
ये चांदनी रातों में चमकता भी बहुत है।
क्या बातहै नफ़रत की सियासत के सबब से।
ये प्यार की ख़ुशबू से महकता भी बहुत है।
ये वक्त के दामन में छुपा प्यार का पल है।
ये ताज महल ........................

आग़ोश में हंसते हुऐ फूलों के बग़ीचे।
और उनमें बिछे घास के ये सब्ज़ ग़लीचे।
किस हुस्न से शीराज़ ने फुरसत में तराशे।
ये ताक़, ये गुम्बद, ये कंगूरे, ये दरीचे।
ऐ शाहजहां ये तेरे सपनों का महल है।
ये ताज महल ........................

ये ख़ुल्द के मंज़र को निगाहों में समेटे।
सदियों की विरासत को है बांहों में समेटे।
है सुब्ह के सूरज की भी हल्की सी तमाज़त।
और चांद की ठंडक भी पनाहों में समेटे।
ये इश्क़ का ग़म्माज मुहब्बत का बदल है। ये ताज महल ........................

ये ताज महल,ताज महल,ताज महल है।
अहसास के पत्थर पे लिखी शोख़ ग़ज़ल है।
ये ताज महल ताज महल ताज महल है।
-अंजुम अल हसन
 
एक वर्ष पहले
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