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ग़ज़ल

Anjum Aligarhi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
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तेरी नजरों में अगर मैं इक दिवाना हूं तो हूं।
दुश्मनों के तीर का गोया निशाना हूं तो हूं।।

दूर से इमदाद का ये भी सलीका मुझ में है।
तपते सहरा में किसीका शामियाना हूं तो हूं।।

हुस्न की शायस्तगी में वो कशिश है क्या करूं।
नेकदिल होते हुए भी आशिकाना हूं तो हूं।।

आपकी बातों पे शैदा आपकी जिद पर फिदा।
आपके नखरों का आशिक़ वालिहाना हूं तो हूं।

आपको चाहा है लेकिन आपको देखा नहीं।
आपका आशिक़ हसन मै ग़ायबाना हूं तो हूं।।

अंजुम अल हसन
2 महीने पहले
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