आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ग़ज़ल

                
                                                         
                            ग़ज़ल
                                                                 
                            

तेरी नजरों में अगर मैं इक दिवाना हूं तो हूं।
दुश्मनों के तीर का गोया निशाना हूं तो हूं।।

दूर से इमदाद का ये भी सलीका मुझ में है।
तपते सहरा में किसीका शामियाना हूं तो हूं।।

हुस्न की शायस्तगी में वो कशिश है क्या करूं।
नेकदिल होते हुए भी आशिकाना हूं तो हूं।।

आपकी बातों पे शैदा आपकी जिद पर फिदा।
आपके नखरों का आशिक़ वालिहाना हूं तो हूं।

आपको चाहा है लेकिन आपको देखा नहीं।
आपका आशिक़ हसन मै ग़ायबाना हूं तो हूं।।

अंजुम अल हसन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर