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नन्हें-नन्हें पाँवों में पैंजनिया बाजे

Anjani Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नंद के आँगन मची है बधाई,
        
                                                    
                            
गोकुल में आए हैं कृष्ण कन्हाई।

भादों की वह रात घनेरी,
चमक रही थी बिजली बेरी।
कंस खड़ा था पहरा डाले,
जेल के ताले थे मतवाले

मथुरा के उस कारागार में,
भय छाया था हाहाकार में।
तभी हुआ एक दिव्य उजाला,
प्रगट हुए प्रभु दीनदयाला।
शंख, चक्र और गदा हाथ में,
अद्भुत कांति थी उस रात में।
देवकी-वासुदेव मुस्काए,

नन्हें-नन्हें पाँवों में पैंजनिया बाजे,
माथे पर मोरपंख अति सुंदर साजे
।ग्वाल-बाल संग जो गैया चराए,
वही तीन लोक का स्वामी कहाए
।कालिया नाग को जिसने नाथा,
इंद्र का मान पल में तोड़ा
।बनकर सारथी अर्जुन का,
महाभारत का रुख ही मोड़ा।
आओ मिलकर आरती उतारें,
कण-कण में उस मोहन को निहारें।
हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की,
आज झूमकर हम सब कन्हाई को पुकारें।
-अंजनी मिश्रा
 
एक महीने पहले
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