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हम बहनों का अपना घर

Anita Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज हमारे पहले अपने घर का गृह प्रवेश है,
        
                                                    
                            
इसकी ईंट-ईंट पर हम बहनों के सपनों का लिखा लेख है।"
इस घर में हम अपने आत्मसम्मान के साथ रहेंगे,
सुबह उठकर किसी की गुस्से से भरी
नजरों को नहीं सहेंगे।
गर्मी की छुट्टियों में लेकर आऊँगी सारे बच्चों को
"यहाँ प्यार मिलेगा इतना कि बच्चों को नानी का प्यार याद तो आएगा, पर उनके आँगन की कमी नहीं खलेगी।"
ना बोझ बनेंगें हम किसी भाई के कंधो पर
ना ही यहाँ सास के तानों की बरसात होगी।
ना सुनाई देंगी बिदाई में खर्च होने की बातें
ना ही घर में भीड़ बढ़ने पर पति को कोई परेशानी होगी।
हम भी कुछ दिन आजाद पंक्षी बन उड़ेंगे
अपने घर में अपनी मर्जी से काम करेंगे।
आयेगी कभी मेरी पसंद तो कभी बहनों के
पसंद के खाने की खुशबू,
दूसरों की पसंद को हम अपनी पसंद नहीं कहेंगे।
बिताकर कुछ खुशियों से भरे दिनों को ,
वापिस यहीं मिलने का वादा कर
हम फिर से अपनी -अपनी ससुरालों में जा बसेंगे।
हमें गर्व है अपने माँ-बाप पर जिन्होंने
घर, परिवार,रिश्तेदारों से तालमेल बिठाने के साथ-साथ
हमेँ अपना आत्मसम्मान बचाना भी सिखाया है।
-अनिता शर्मा बुंदेलखंडी
एक महीने पहले
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