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सावन : बूँदों में बसी प्रीत”

Anita Chaturvedi

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                            सावन : बूँदों में बसी प्रीत”
        
                                                    
                            

सावन की रिमझिम फुहार,
लायी भक्ति का अनुपम उपहार।
हरित धरा ने ओढ़ी चुनरिया,
मन में जागा प्रेम अपार।

शिव-शक्ति का सजा दरबार,
गूँज उठा हर ओर ओंकार।
गौरा-पार्वती के पावन चरणों में,
श्रद्धा ने अर्पित किए सुमन हजार।

बूँद-बूँद में भक्ति घुली है,
हर साँस हुई शिवमय आज।
मन-मंदिर में दीप जले हैं,
मिटने लगी हृदय की लाज।

पर सावन केवल पूजा नहीं,
यह मन की स्मृतियों का मौसम है।
किसी की यादों का सावन बनकर,
फिर लौट आया वह मनभावन है।

बादल बनकर घिरती यादें,
बूँदें बनकर छूती हैं तन-मन।
भीग उठे हैं नयन अचानक,
जाग उठा कोई भूला स्पंदन।

विरह की तपती राहों पर,
बूँदों ने जैसे रख दी छाँव।
प्रीति के धागों से बँधकर,
मन ने फिर पा लिया अपना गाँव।

सज गया सपनों का उपवन,
महक उठा मन का संसार।
सावन ने फिर कह दिया चुपके—
प्रेम रहे तो जीवन गुलज़ार।

अब विदा हो रहा पावन सावन,
फिर होगा इसका इंतज़ार।
भक्ति, प्रेम और मीठी स्मृतियाँ
रख जाएँगी मन में अपना संसार।

शिव के चरणों में श्रद्धा रहे,
हृदय में प्रेम की धार।
हर सावन यूँ ही लौटे जीवन में,
लेकर सुख-सौभाग्य अपार। 
- अनिता चतुर्वेदी 'मनस्वरा'
एक महीने पहले
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