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एक हाथ की दूरी

Anita Chaturvedi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक हाथ की दूरी~
        
                                                    
                            

बारिश की इन बूँदों में,
कुछ अनकहा-सा बहता है,
एक हाथ किसी हाथ को
चुपचाप पुकारता रहता है।

न शब्दों की कोई आहट,
न वादों का कोई शोर,
बस उँगलियों के बीच ठहरी
एक अधूरी-सी डोर।

वह हाथ बढ़ा तो था शायद,
कुछ पल थामने के लिए,
या भीगे मौसम में बिखरे
सारे ग़म बाँटने के लिए।

लेकिन बीच में समय खड़ा था,
कलाई पर पहरेदार बना,
हर पल अपनी चाल बताता,
फिर भी मन से बेख़बर रहा।

बारिश गिरती रही निरंतर,
हथेली भीगती जाती है,
जिस स्पर्श की आस बची है,
वह और दूर हो जाती है।

कितनी अजीब है मन की दुनिया—
पास होकर भी दूरी है,
बस एक हाथ की दूरी भर,
और पूरी उम्र अधूरी है।

काश कोई बूँद संदेश बने,
हथेली पर आकर ठहर जाए,
जो बात होंठ कह न पाए,
वह स्पर्श कहकर गुजर जाए।

फिर न घड़ी समय को बाँधे,
न राहों में कोई मजबूरी हो,
बस हाथों में हाथ रहे और
हर दूरी अपनी दूरी हो।
- अनिता चतुर्वेदी 'मनस्वरा'
22 घंटे पहले
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