हाथों में हाथ, होंठों पे अफ़साने प्यार के,
मंज़िल की ओर चल पड़े दीवाने प्यार के।
आँखों में पल रहे थे सुनहरे-से ख़्वाब कुछ,
दिल में सजे हुए थे नए तराने प्यार के।
राहों में धूप थी, कभी छाया भी मिल गई,
चलते रहे सँजोकर नज़राने प्यार के।
दुनिया ने लाख रोकना चाहा कदम मगर,
हमने चुने थे दिल से फ़साने प्यार के।
काँटों से भी गुज़र गए हँसते हुए कदम,
जब साथ तुम रहे तो न थे वीराने प्यार के।
तूफ़ान आए, राह में बादल भी छा गए,
हमने बुझने न दिए दिल के परवाने प्यार के।
एक-दूसरे की धड़कनें पढ़ते रहे सदा,
ख़ामोशियों में मिल गए पैमाने प्यार के।
न कोई शर्त थी, न कोई स्वार्थ था यहाँ,
बस दिल ने दिल से बाँट लिए ख़ज़ाने प्यार के।
मंज़िल मिले न मिले, सफ़र ख़ूबसूरत है,
हमने सजा लिए हैं कई बहाने प्यार के।
कल क्या होगा, इसकी हमें फ़िक्र ही नहीं,
आज ही जी रहे हैं हम ज़माने प्यार के।
जब तक रहेगी साँस, रहेगी यही दुआ—
महफ़िल में गूँजते रहें तराने प्यार के।
हाथों में हाथ, होंठों पे अफ़साने प्यार के,
मंज़िल की ओर चल पड़े दीवाने प्यार के।
- अनिता चतुर्वेदी ‘मनस्वरा’