प्यार का दर्द हमको बहुत रुलाया है,
पर ये जो महकमा है, हमको रुक-रुक के बुलाया है।
हम तो उस गली में आते-जाते हैं,
लोगों का क्या है, हम तो जन्नत को छू के आते हैं।
प्यार के नशे में तुम्हारा नाम बता दें,
हम इतने पीते नहीं कि कोई इल्ज़ाम लगा दे।
नशा तो प्यार में होता है, ज़ालिम,
हम तो मोहब्बत का किनारा फ़साने में ही ढूँढ़ लेते हैं।
शराब और शबाब तो मिल ही जाता है,
इरादा तो शीशे की तरह टूट ही जाता है।
मोहताज न बना देना प्यार के रुआब में,
हम तो वो आशिक हैं,
जो ख़्वाहिशों को भी बेच जाते हैं।
-अनिल शाह