विज्ञापन

ग़मों की उम्र ज्यादा हो गई है

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ग़मों की उम्र ज्यादा हो गई है
        
                                                    
                            
जिंदगी बे इरादा हो गई है
खुशी की मिन्नतें करता हूं फिर भी
वो जाने पर आमादा हो गई है
मुझे हर चीज धुंधली दिख रही है
शराब आज ज्यादा हो गई है
न जाने कब मिटा दे खाक कर दे
मोहब्बत वो शरारा हो गई है
सियासतदान लड़ते जा रहे हैं
सियासत बेसहारा हो गई है
बहुत कम झूठ वैसे बोलता हूं
तबीयत अब तो सादा हो गई है
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all