विज्ञापन

गुजर गई

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शाखों से गिरे पत्तों की तरह बिखर गई
        
                                                    
                            
उजले हसीन चेहरे की तरह निखर गई
वो हाल हुआ है कि हुआ शोर हर तरफ
खामोश निगाहें तेरी क्या क्या न कर गई
रहती थी जो होठों पे तस्सुम की तरह से
रुत बदला तो अनजान हवा सी गुजर गई
ये इश्क चढ़ गई दिलों की हर बुलंदियां
उतरी भी तो नशे की तरह से उतर गई
कश्ती मेरी डूबी नहीं लहरों के कहर से
तूफान में लड़कर भी मुझे पार कर गई
तू गया शहर से तेरे एहसास रह गए
आया मुझे नजर जहां जहां नजर गई
लुट कर भी मोहब्बत में खुश तो है मुसाफिर
उजड़ा भी इस तरह की जिंदगी संवर गई
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prashant Rastogi

8 कविताएं

View Profile

Kunwar Sarvendra

167 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8777 कविताएं

View Profile

anupam shah

99 कविताएं

View Profile

Aradhana Verma

252 कविताएं

View Profile