विज्ञापन

अब तो ज्यादा असर नहीं होता

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दर्द उठता है बहुत घावों से
        
                                                    
                            
नींद आती है अब दवाओं से
बेवफाई का सिला देता रहा
मैं न जाने भी क्यों वफाओं से
ख्वाब पलकों पे सजाता मैं रहा
वो कुचलता ही रहा पांवों से
धूप बारिश ने जान ही ले ली
तंग आया जो घर छांवों से
जान जोखिम में दीए की थी
बात करता रहा हवाओं से
जुर्म पर जुर्म कोई करता रहा
मैं भी बचता रहा सजाओं से
अब तो ज्यादा असर नहीं होता
मर मिटे थे इन्हीं अदाओं पे
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Prasoon Saxena

973 कविताएं

View Profile