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खुद को अपने साथ लिए

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये इम्तहान बताकर कभी नहीं होता
        
                                                    
                            
बरसते हैं कभी बादल बिना आवाज किए
हकीकतों में जो करना नहीं मुनासिब था
ख्यालों में भी कुछ हमने शहर आबाद किए
अंधेरों में छुपी थी रोशनी की उम्मीदें
हमारे शहर ने जंगल बहुत बर्बाद किए
जो हमने खो दिया पाना नहीं हुआ मुश्किल
देखा तकदीर को सबने हमें आदाब किए
कोई हिम्मत कोई मेहनत कोई किस्मत भी
मुझे मिलती रहीं,अपने बहुत सौगात लिए
कभी टूटे कभी उजड़े मगर जज्बात लिए
रहे मैदान में हम खुद को अपने साथ लिए
2 महीने पहले
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