विज्ञापन

यों दर बदर भी क्यों रहते हो

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जीना कुछ आसान बना लो
        
                                                    
                            
मुझको अब मेहमान बना लो
जीवन के सब लुत्फ मिलेंगे
खुद को बस नादान बना लो
चांद सितारे दूर नहीं हैं ,इस
जमीं को आसमान बना लो
अच्छे लोग शहर में भी हैं
उनसे कुछ पहचान बना लो
यों दर बदर भी क्यों रहते हो
खुद का एक मकान बना लो
भीड़ उजालों की बाहर है
घर में रोशनदान बना लो
वक्त के करवट से न मिटें जो
राहों में ऐसे निशान बना लो
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile