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यों दर बदर भी क्यों रहते हो

                
                                                         
                            जीना कुछ आसान बना लो
                                                                 
                            
मुझको अब मेहमान बना लो
जीवन के सब लुत्फ मिलेंगे
खुद को बस नादान बना लो
चांद सितारे दूर नहीं हैं ,इस
जमीं को आसमान बना लो
अच्छे लोग शहर में भी हैं
उनसे कुछ पहचान बना लो
यों दर बदर भी क्यों रहते हो
खुद का एक मकान बना लो
भीड़ उजालों की बाहर है
घर में रोशनदान बना लो
वक्त के करवट से न मिटें जो
राहों में ऐसे निशान बना लो
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29 मिनट पहले

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